ये टूरिस्ट आपकी जान भी ले सकते हैं क्या ? आखिर क्यों सबसे ज्यादा विदेशी पर्यटक पिछले वर्ष झारखंड गए ?

अखबारों में पन्नो पर ऐसे सर्वे, आंकड़े और नतीजे अक्सर देखने मिल जाते हैं | सामान्य आदमी इन्हें कभी रोचकता से तो कभी बेरुखी से पढ़ कर आगे बढ़ जाता है | यहाँ फोटो में जो खबर में दिखाई गयी है यह २३ जुलाई २०१६ के राजस्थान पत्रिका के अहमदाबाद संस्करण में प्रकाशित हुयी है | देखने में ये बहुत ही सामान्य बात लगती है और सामान्य लोंग इनसे सामान्य निष्कर्ष निकल कर, सामान्य चर्चा करके  शांत हो जाते है | उदाहरण  के लिए एक युवक ने कहा ये खबर गलत है क्योंकि सबसे ज्यादा टूरिस्ट तो गोवा में आते है | एक युवक का अपना जितना सामान्य ज्ञान था उसके आधार पर उसने विश्लेषण कर दिया | परन्तु राष्ट्र की हर हलचल से सरोकार रखने वाले लोगों के लिए ये खबर बहुत मायने रखती और और इसमें छुपी सम्भावना तो खतरे की घंटी की तरह है |

हो सकता है आपने सुप्रसिद्ध विद्वान और लेखक राजीव मल्होत्रा की ब्रेकिंग इंडिया (भारत विखंडन) पुस्तक न पढ़ी हो| पर अगर आपने देश की सुरक्षा और अखंडता के खतरे उजागर करती यह पुस्तक पढ़ी है तो आपको देश में होने वाली सभी प्रकार की चाहे राजनैतिक हो या अकेडमिक, सामाजिक या धार्मिक घटनाओ में विदेशी मिशनरी षड्यंत्र और विदेशी राजनीती का हाथ कैसे कम कर रहा है स्पष्ट समझ में आता होगा |

माओवादियों ने वर्ष 2007 में हथियारों की खरीद पर 1.75 अरब रूपए खर्च किये थे | इनके पास जंगलों के लिए स्पेशल मोटरसाइकिलें हैं | लो-फ्रीक्वेंसी रेडियो सिस्टम हैं और सबसे बड़ी बात उड़ीसा, बिहार, झारखण्ड और छत्तीसगढ़ के  सभी इसाई संगठनो से खासी मित्रता है, दोनों अपने साझे शत्रु ‘भारत’ के खिलाफ मिलकर काम करते हैं  |

बिहार सरकार के एक अभिलेख में अनेक संदेहास्पद NGO की सूची है जो किसी दूसरे काम के लिए आया धन माओवादियों  को देते हैं , इन  में अधिकाँश  को यहाँ आने वाले पर्यटको से धन प्राप्त होता है | बिहार के पूर्व गृह सचिव अफजल अमानुल्लाह ने कहा कि “गुप्तचर एजेंसियों ने रपट ही दी थी कि ऐसी चीजें सुनियोजित तरीके से हो रही हैं | अब हमें विदेशियों को चेतावनी देनी पड़ती है और काफी योजना बनानी पड़ रही है ताकि इस चिंताजनक रोग को फैलने से रोका जा सके” |भारत (इनक्रेडिबल इण्डिया) विविधता वाला देश है और इसका हर कोना हर गाँव अपने आप में तीर्थ है | भरत के प्रत्येक राज्य और जिले में आपको पर्यटन और सैर की दृष्टी से अनेक महत्वपूर्ण स्थान मिल जायेंगे | बहुत प्राचीन सभ्यता वाला राष्ट्र होने के कारण भारत का प्रत्येक स्थान ऐतिहासिक है और कुछ न कुछ विशेषता धारण किये हुए है |  झारखण्ड भी  ऐसा ही स्थान है यहाँ के वन, प्राकृतिक सम्पदा, imagesसंस्कृति, और धार्मिक स्थल बड़े ही दर्शनीय हैं | पर भारत के सामान्य नागरिक होने के नाते इतना तो सबको पता होगा की भारत में कश्मीर, उत्तराखंड, केरल, गोवा, कोंकण, दार्जिलिंग, शिमला, ऊटी, आसाम, अरुणाचल कुछ ऐसे नाम है जो टूरिज्म के लिए सबसे पहले आते हैं | शायद ही कोई ऐसी जगह हो जो झारखण्ड में हो और देश भर से लोग वहां घूमने आते हो कहने का आशय है जैसे वैष्णो देवी या तिरुपति का महत्व है उस हिसाब से झारखण्ड बहुत पीछे है | परन्तु देश की अखंडता की दृष्टी से देखे राजनैतिक महत्व के हिसाब से देखें या इसाई मिशनरियो के नजरिये से देखें तो झारखण्ड में बहुत संख्या में जन-जातीय लोग रहते है | उपरोक्त फोटो में दर्शाए गए आंकड़े दिखाते हैं कि इस से पहले के वर्ष में विदेशी लोग सबसे ज्यादा मात्र में तमिलनाडु में आये थे | तमिलनाडु का केस सबसे अलग होने के कारण यहाँ अंतर्राष्ट्रीय गतिविधिया और हस्तक्षेप सबसे ज्यादा हुआ है | तो फिर अब विदेशो से लोग झारखण्ड में क्या देखने, घूमने आ रहे हैं ? क्या इस विषय पर सावधान होने की जरूरत है ? या सब ठीक है और सामान्य रूप से झारखण्ड का टूरिज्म सबसे ज्यादा आकर्षक हो गया है ? या वेटिकन और अमेरिका किसी जुगत में लगे हैं ? हिन्दू-मुस्लिम, फिर सवर्ण-दलित , फिर उत्तर भारतीय-दक्षिण भारतीय, हिंदी-गैर हिंदी, फिर आदिवासी-मूलनिवासी-आर्य, अब ??? नक्सलवाद पहले से ही झारखण्ड की समस्या बना हुआ है जहाँ इतनी बड़ी मात्र में अचानक से विदेशियों का आना चिंता का विषय है |

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