न्यूज चेनल पर बेहूदा बहसों से लिया सबक फिर चेनल फिर “आजतक” नहीं देखा

18 सितम्बर 2015, ऋषि पञ्चमी,  (पुरानी डायरी से)

 

टीवी पर शाम को होने वाली बे-नतीजा, उबाऊ बहसों से सभी  वाकिफ हैं, अब तो जनता भी त्रस्त हो चुकी हैं इनके तथाकथित एक्सपर्टों की राय सुन-सुन कर | कभी-कभी  ये बहसें बिलकुल एकतरफा भी होती हैं तब मन में सवाल उठता है कि टीवी-पत्रकारिता की कोई नीति-रीती है या नहीं ? या सिर्फ मनोरंजन, मिर्च-मसालों से टीआरपी बढ़ाउ खबरे प्रसारित करना ही इकलोता लक्ष्य है ? कभी-कभी ये लोग शून्य में से खबर उगा देते हैं और उसी पर पांडित्यपूर्ण बहस करने लग जाते हैं | नेताओं और सेलेब्रिटीयों  का बयान इनका पसंदीदा व्यंजन  होता है |  anjana 4.png

ऐसा ही वाक्या आज तब देखने को मिला जब वरिष्ठ न्युज-एंकर अंजना ओम कश्यप एक सनसनीखेज खबर दिखाने का दावा करते हुए कहतीं हैं कि एक नेताजीने एक समुदाय विशेष की देशभक्ति पर सवाल उठा कर बवाल खड़ा कर दिया है ……

और फिर खबर दिखाई जाती है जिसमे वो नेताजी उसी चेनल के स्टूडियों में इंटरव्यू दे रहे थे  |anjanaom.png

पत्रकार उनसे दिल्ली में औरंगजेब रोड का नाम बदलने पर उनसे उनकी राय पूछता है जिसके जवाब में नेताजी कहते हैं कि  औरंगजेब इतिहास में कोई महापुरुष या देशभक्त व्यक्ति के रूप नहीं जाना जाता अपितु एक बर्बर शासक, अत्याचारी के रूप में कुख्यात है | तब ऐसे व्यक्ति के नाम पर देश की राजधानी में एक सड़क का नाम होना दुर्भाग्यपूर्ण है  और विवादस्पद भी | इसलिए भारत सरकार ने भारत माता के महान सपूत और महापुरुष डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम का नाम उस रस्ते को देने का फैसला किया है |anjana 2.png

अब देखिये नेताजी की जिस बात को “तथाकथित सबसे तेज चेनल” विवाद का नाम दे रहा है वह इसी बयान में निहित एक वाक्य है और वह है  “इसीलिए ऐसे व्यक्ति जो मुस्लिम भी हों और देशभक्त भी हों , के नाम पर सड़क का नामकरण करने का  फैसला लिया गया है ”  ….   इस एक पंक्ति को “जो मुस्लिम भी हों और देशभक्त भी हों” सन्दर्भ से बाहर लेकर, अपनी ब्रेकिंग न्यूज  बनाकर जैसे की महान आविष्कार हाथ लग गया हो, प्रसारित किया गया | अंजना  चीख चीख कर सवाल पूछने लगीं कि क्या मुस्लिम देशभक्त नहीं होते ? ऐसे में जनता द्वारा इन पत्रकारों के बौद्धिक स्तर और मंशा पर सवाल उठाना लाजमी है |anjana 3.png

चूंकी औरंगजेब के नाम पर सड़क थी, जो कि मुस्लिम शासक था , अब यदि उसके नाम को हटा कर सरकार इस रोड का नाम विवेकानंद मार्ग कर देती तो पूरे देश में सेक्युलरों, बुद्धिजीवियों तमाम पत्रकारों को कुपच होने लगती,  वे इसके खिलाफ आन्दोलन तक छेड़ देते, और सरकार पर भगवाकरण, हिन्दूकरण का आरोप लगा डालते तत्काल, तब यह कहा जा सकता था कि सरकार ने विवाद पैदा किया है ! परन्तु किसी संगठन, दल, या किसी वर्ग को ये न लगे कि भेदभाव हो रहा है, इसलिए नेताजी ने कहा कि जो मुस्लिम भी हो और राष्ट्रभक्त भी हों, महान हो, प्रेरणास्पद हो, |  ये चैनल अब्दुल कलाम का व्यक्तित्व ही भूल गया मुस्लिम तुष्टिकरण के चक्कर में | क्या ये बात किसी से छुपी है कि सारे आतंकवादी भी तो मुलिम ही होते हैं, वो भी पूरी दुनिया में ! नेता का आशय कुछ और था न कि मुस्लिमों की देशभक्ति पर सवाल उठाना | इर तरह तो ये चेनल वाले ज्यादा असहिष्णुता बढ़ा रहे है | चाचा चिदंबरम बहुत लिखने का शौक रखते थे असहिष्णुता विषय पर | पर इस पर नहीं लिखेंगे क्योंकि वोट-बैंक की राजनीती जो करनी है कांग्रेस को |

मीडिया ने जो अच्छे काम किये हैं समाज के लिए, आम-आदमी का दर्द सरकार तक पहुंचाया है उसी के बल पर उसे सम्मान और लोकप्रियता मिली है वो लोकप्रियता इस प्रकार की छोटी और स्तरहीन ख़बरों से  बिगड़ने में कितनी देर लगेगी ?

इसीलिए सही और निष्पक्ष ख़बरों के कारण आज zee news देश का न. वन चेनल बना हुआ है |

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