चिंता करने की कोई जरुरत नहीं, आपका WI-FI और मोबाईल रेडियेशन बिलकुल सुरक्षित है | इस से कोई हानि नहीं होती है |

 

download.pngआपका wifilogo.jpgwi-fi व मोबाईल पूरी तरह सुरक्षित हैं व इनसे किसी भी प्रकार की हानि नहीं होती है | आप चाहे तो इस लेख को बिना पढ़े ही जा सकते है क्योंकि इतना जानना पर्याप्त है | परन्तु आप यदि यह जानना चाहते है कि क्यों और कैसे wi-fi हानिकारक नहीं है अथवा अपने चिंतित-मित्र को समझाना चाहते है तो आप के लिए ये विश्लेषण है |

आपको इंटरनेट पर ढूँढने से अथवा बिना ढूंढें  ही इस प्रकार के सैकड़ो लेख मिल जायेंगे जो आपको किसी न किसी प्रकार से डरायेंगे, असल में इन लेखों/वीडियों  के  फैलने का कुछ और ही कारण है जो लेखक के आर्थिक हित से जुड़ा होता है | दूसरी बात आप अगर खुद के हानिकारक प्रभाव भी ढूंढेंगे तो google आपको उसके जवाब भी दे देगा, आप बात करने, सुनने, पढने, खेलने से लेकर, सूर्य के, पानी के, हवा के …किसी भी चीज के हानि कारक-प्रभाव इंटरनेट पर ढूँढेंगे तो आपको उस से can-electromagnetic-waves-wi-fi-routers-mobile-phones-really-make-you-ill.jpgसम्बंधित रिपोर्ट/लेख मिल जायेंगे | परन्तु ये सब कोई वैज्ञानिक संस्थाओं द्वारा नहीं बनाये होते हैं | वैसे कुछ लोग रेडियेशन शब्द सुनकर ही डर जाते है, तो सर्दियों में जब आप धूप का मजा लेते हैं वह भी रेडियेशन ही होता है | इसलिए रेडियेशन शब्द सुनते ही डरने की आवश्यकता नहीं है | बात करे अपने मोबाईल और wi-fi  की तो आप को जानना चाहिए  तरंग दो प्रकार की होती है |  पहली IONISED व  दूसरी NON-IONISED | 

danger_ionizing_radiation_warning_sign.pngइनमे पहली वाली  बहुत घातक होती है, ख़ुशी की बात है कि ये आपके मोबाईल अथवा wi-fi द्वारा नहीं छोड़ी जाती हैं | अपितु X-RAY, परमाणु-विकिरण, गामा-तरंगे ही IONISED होती है, इसलिए मेडिकल उपकरण में इनका बहुत नियंत्रित प्रयोग शामिल किया गया है, अगर कभी आपने X-RAY कराया होगा तो आप जानते हैं कि सेकंडो में यह कार्य किया जाता है, वो भी अन्य उपकरण के नियंत्रण में | ठीक ऐसे ही परमाणु संयंत्रो  में भी अत्यधिक उन्नत उपकरणों द्वारा इन तरंगो को नियंत्रित किया जाता है, ताकि मनुष्य उस स्थल पर कार्य कर सकें | ये किरने MUTATION (त्वरित-आनुवंशिक परिवर्तन) के लिए जिम्मेदार होती है, यानी ये केंसर से लेकर कोई भी बीमारी देने के साथ-साथ पूरा शरीर ही परिवर्तित कर सकती है, चंद सेकण्ड में ये शरीर तबाह भी कर सकती है | लेकिन इनसे हमें क्या ?

वहीँ दूसरी किरणे/तरंग जिन्हें NON-IONIZED कहते हैं, इनका प्रयोग हम वर्षों से रेडियो द्वारा WARNING_SIGN_NON_IONIZING_RADIATION__38402.1362074637.1280.1280.jpgगाने और समाचार सुनने हेतु करते आ रहे हैं, पोलिस के वायरलेस में भी इसी तरंग का प्रयोग होता है | अब तक इनको हानि-रहित  पाया गया है | केवल एक जो सम्भावना कि जैसे किचन के ओवन में ये खाना गर्म करती है, यानी वस्तु  को HEAT प्रदान करती हैं का हमारे वायरलेस उपकरणों से कोई लेना देना नहीं है, मोबाईल (कोई भी), wi-fi कैसा भी हो इनसे बहुत सीमित क्षमता की तरंग उत्पन्न होती है यानी अगर कमरे wi-fi से एक बूँद पानी भी गर्म करना हो तो शायद पूरी जिंदगी इंतज़ार करना पड़े ! जहाँ एक ओवन औसतन 700 WATT की तरंग पैदा करता है, वही सबसे पावरफुल wi-fi ROUTER भी 1 WATT के आस-पास ही होता है |

भौतिकी के नियम  (INVERSE-SQUARE LAW)images.png के मुताबिक आप ROUTER को अपने चाहे जितने पास रखिये, यहा तक की अपने सर के ठीक सामने तब भी कोई हानि नहीं होती है | ये तरंगे बहुत कम उर्जा की होती है | दूसरी बात wi-fi के जाल में बुने सार्वजानिक स्थल जैसे अस्पताल या स्कूल आदि में भी अंतर्राष्ट्रीय मानकों से तुलना करें तो भी बहुत कम क्षमता (उर्जा) की किरणों की उपस्थिति होती है | International Agency for Research on Cancer (IARC) और WHO जैसी संस्थाओं के अब तक के सारे प्रयोगों में इन्हें हानिरहित और किसी भी स्थिति में मनुष्य के उपयोग करने लायक बताया गया है | इनसे अगर कोई हानि हुयी तो वह सिर्फ सोशल-साईट्स के अति-इस्तमाल से हुई समय बर्बादी ही होगी | स्वास्थ्य की दृष्टी से आपके सभी वायरलेस कम्युनिकेशन उपकरण सुरक्षित हैं |  

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