क्या हम सब हैं अभिमन्यु हैं ? कीजिये गर्भस्थ शिशु से सम्वाद !

महाभारत के अभिमन्यु की कहानी हम सब बड़े अचरज से सुनते और सुनाते है |

इसमें अचरज क्या है ? यह कि उसने गर्भ में वह चक्रुव्यूह भेदना सीख लिया था  ?

 जी नहीं, असल में  यह अचरज नहीं है | 4334bdb2789b79c30b32be0f4bb78712अचरज तो मात्र यह है कि सीखी हुयी बात उसे याद थी ! मतलब गर्भ में सीखते तो सारे शिशु हैं, अभिमन्यु को सिर्फ वह चीज हमेशा याद रही थी, हो सकता है कि महाभारत जैसे भीषण युद्ध काल के वातावरण से उसे यह चेतना हो आई हो, या तत्कालीन गुरुकुलीय शिक्षा का, योगआदि साधना का परिणाम हो खैर  जो भी हो हमारा आज का विश्लेषण का बिंदु मात्र यह है कि गर्भ में पल रहा शिशु कुछ जानता है या नहीं, कुछ सुनता है या नहीं, कुछ सीखता है या नहीं ?  

तो उत्तर है हाँ ! हाँ यह सब बहुत ही सामान्य प्रक्रिया है | आधुनिक विज्ञान भी इस पर शोध करके पुष्टि कर चुका है |

गर्भ के दूसरी तिमाही (23-24 सप्ताह की अवधि) में भ्रूण बाहरी आवाजों को पहचानना शुरू कर देता है |article-0-0695fcd7000005dc-674_468x286 निरंतर सुनाई देने वाली आवाजों के प्रति  जन्म पश्चात वह खुद को अधिक परिचित महसूस करता है, वे आवाजें उसे डराती नहीं है| यहाँ तक कि प्रयोग बताते हैं कि जो आवाज उसने पहले सुनी हुई होती हैं उनके प्रति उसकी प्रतिक्रिया  एक प्रकार की और दूसरी नई आवाजों के प्रति उसकी प्रतिक्रिया दूसरी प्रकार की होती है |Untitled.png
इसलिए माँ की आवाज पर बच्चे की प्रतिक्रिया सबसे अलग होती है | पिताजी लोगों को दुखी होने की जरुरत नहीं है अगर भ्रूण काल में उसने आपकी भी आवाज सुनी है तो  आपकी आवाज पर भी प्रतिक्रिया होगी !

 वैसे विज्ञान का मानना  है कि भ्रूण की हालिया विकसित श्रवण इन्द्रिय और बाहरी आवाज के बीच काफी व्यवधान होते हैं इसलिए बाहरी आवाजें उसे “धीमी” सुनाई देती है | जबकि  माँ के पेट में चल रही शारीरिक-प्रक्रियाओं की आवाजें वो स्पष्ट रूप से सुनता है और माँ की आवाज भी, इसके लिए माँ का शरीर मदद करता है | एक प्रयोग में जब भ्रूण की ह्रदयस्पंदन  को अध्ययन किया गया तो पाया गया कि माँ की आवाज सुनकर उसकी गति बड़ गई है | इसलिए माँ  के द्वारा किसी चीज को पढना,  किसी विषय पर गर्भावस्था के दौरान बार-बार चर्चा करना, या कोई  गीत कविता बार-बार  गाना उसे आपके नजदीक लाता है, आपके यानी आपकी आवाज के | (अनुमान से हम कह सकते हैं कि अर्जुन-द्रौपदी अक्सर युद्धकला और नीति पर चर्चा करते होंगे)article-2272783-137afb1a000005dc-851_634x448 असल में अगर आप ठीक-ठाक छानबीन कर सकते है तो कीजिये आप पायेंगे, पश्चिम के हर नए प्रयोग (hypothesis) की प्रेरणा में भारतीय ग्रन्थ ही है | कहने का मतलब अगर भ्रूण अध्ययन की प्रेरणा मिली तो कहीं न कहीं उनके अवचेतन में “भारतीय किवदंती” घूम रही थी | क्योंकि जितना भारतीय ग्रंथो का अध्ययन भारतीयों ने श्रद्धा से नहीं किया है उससे कहीं ज्यादा अध्ययन पश्चिम ने उत्सुकता या किसी नकारात्मक दुष्प्रेरण से किया है | मैं यह इसलिए भी कह रहा हूँ क्योंकि  पश्चिम में इस बात को लेकर अनेक बातें कही सुनी जाती है मसलन जैसे अगर आप गर्भावस्था के दौरान क्लासिकल संगीत सुनेंगी तो आपके बच्चे की आईक्यू बढ़ेगी आदि आदि | हालांकि अगर ऐसा होगा तो कैसे होगा यह विज्ञान को फिलहाल नहीं पता है, इसलिए फिलहाल विज्ञान इस विषय पर  ख़ास मार्गदर्शन नहीं कर पा रहा है | आपको आश्चर्य होगा परन्तु यह सत्य है कि सैकड़ो भारतीय ग्रन्थ और उनकी कहानियाँ भारत में अन्ग्रेजों के आने के पहले से ही पश्चिम में मौजूद थे | खैर विज्ञान की जहाँ तक सीमा है उसने वहां तक खोज की और हम उसके आभारी है |119706826.jpg इस खोज का “भारतीय पक्ष” जो आपको वैसे भी मालूम ही होगा यानी “भ्रूण का गर्भ में शिक्षा संस्कार”, हम इस पर बात करते है | हमारे देश में बताया गया है कि  आपको जैसी संतान  चाहिए वैसी  संतान आप प्राप्त कर सकते हैं पर इसके लिए माँ को मेहनत करनी पड़ेगी | उदहारण के लिए आप वीर संतान चाहते हैं तो माँ को ऐसे वीर-व्यक्तित्व की कहानियाँ पढनी चाहिए जैसे शिवाजी महाराज या महाराणाप्रताप, लक्ष्मीबाई, अहिल्या, दुर्गावती, वीर रस की कवितायें पढनी, बोलनी चाहिए,| इन पर चर्चा करनी चाहिए, दूसरो को सुनानी चाहिए | यहाँ तक कि घर में उसी प्रकृति के चित्र भी लगाने चाहिए | आपको मर्यादा पुरुषोत्तम चाहिए तो रामायण का पाठ कीजिये | व्यापारी या खिलाड़ी  चाहिए तो इस क्षेत्र के लोगो की जीवनी पढनी चाहिए | लफंगा-बदमाश -आतंकवादी-बलात्कारी- और आज कल एक जिसकी बहुत डिमांड है  अर्थात “सच्चा प्यार करने वाली/वाला” तो कुछ करने की जरुरत नहीं है ये काम तो आजकल टीवी, अखबार, मनोरंजक-मैगजीन, उपन्यास ही पूरे कर देंगे क्योंकि स्वाभाविक तौर पर इनका ज़िन्दगी में आगमन हो रहा है| इस पूरे विषय को हमारे यहाँ अधिजनन शास्त्र के अंतर्गत रखा गया है | अधिजनन शास्त्र आज बहुत सुन्दर स्वरुप में उपलब्ध है, आप खोजें तो मिल जाएगा | अगर आपको अच्छा पढने का शौक है तो अधिजनन शास्त्र के आलावा गृहस्थ शास्त्र व दैशिक शास्त्र भी प्रत्येक भारतीय घर में होने चाहिए ! (इन पुस्तकों की प्राप्ति का सबसे बढ़िया स्थल है पुनरुत्थान ट्रस्ट  जिसकी वेबसाईट है  http://www.punarutthan.org/

यह लेख आपको कैसा लगा अपनी राय जरुर प्रस्तुत करें | छोटा, बड़ा, अच्छा, रोचक, पकाऊ चाहे जैसा भी लगा हो आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है | इस विषय और सम्वाद के लिए आप हमारे फेसबुक पेज पर मैसेज अथवा कमेन्ट कर सकते है, जिसका पता सबसे नीचे दिया गया है, या होमपेज पर जाकर सबसे नीचे देखें |

चेतावनी: शिक्षा गर्भ से प्रारम्भ होती है इसलिए 12 वर्ष तक की आयु तक मातृभाषा में  शिक्षा पाना हर बालक का हक़ है | कृपया किसी दवाब में बच्चों के मष्तिष्क के स्वाभाविक विकास के साथ खिलवाड़ न करें !

नोट: उपरोक्त चित्र में महिला ने जिस प्रकार अपने शिशु को आवाज सुनाने के लिए शरीर से हैडफोन लगा रखा है, कृपया उसे महत्व न दें, न ऐसा करने की आवश्यकता होती है | यह सिर्फ नए-नए सीखे यूरोपीय लोगों की अति-उत्सुकता है, और कुछ नहीं |

नोट: इस लेख से सम्बन्धित अगर कोई प्रमाणिक सामग्री आप खोज रहे हैं तो निम्नलिखित दी हुई लिंक्स आपके काम आ सकती है |

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