कुत्ते की नहीं “कन्हैया” की मौत मरें मेरे दुश्मन | मुम्बई पुलिस के देशभक्त साथी “सीजर” की मृत्यु पर इस मुहावरे को बदलने का संकल्प ले |

इंसान नहीं थे फिर भी मौत पर कफ़न नसीब हुआ, कफ़न भी “तिरंगा” जो हर इंसान को नसीब नहीं होता | इसे कहते हैं जीवन, जीवन जो वतन के, मानवता के काम आया | 26/11 हमले के समय बम खोजने वाले मुम्बई पुलिस के कुत्ते सीजर ने कल अंतिम स्वांस ली | tiger.jpg

साथी टाईगर की मृत्यु पर दुखी हुआ सीजर

मुंबई पुलिस कमिश्नर ने tweet कर कहा कि यह पल हम सबके लिए भावुक है | यानि पूरा पुलिस डिपार्टमेंट दुखी है | सीजर, टाईगर, सुलतान और मैक्स ये चार दोस्त थे, मुम्बई पुलिस के  चार खोजी कुत्ते | टाईगर ने मुम्बई हमले के दौरान CST स्टेशन के बाहर 8 घंटे ड्यूटी की थी | ऐसे ही मैक्स, सुलतान भी थे | ये तीनों कुछ वक्त पहले ही अपने दोस्त सीजर को छोड़ कर मौत का निवाला बन चुके थे, जब आखिरी दोस्त ने भी साथ छोड़ दिया तब सीजर इतना दुखी हो गया कि वो तबसे फिर ठीक ही नहीं हुआ, बीमार अवस्था में कल उसने भी अंतिम सांस ली | सीजर की अंतिम विदाई पर उसे तिरंगे में लपेट कर आखिरी सलामी दी गई | सीजर एक कुत्ता था लेकिन भारतीय पुलिस के जवान उसे सलामी दे रहे थे कल | जबसे सीजर और उसके चार दोस्त कुत्तों की कहानी सुनी है, कि वे अपने दायित्व को कितनी वफादारी, निस्वार्थता से निभाते थे, तो लग रहा है जैसे,  वे कुत्ते के योनी में जन्मे भले थे परन्तु कर्मों ने उन्हें देवत्व पर बिठा दिया है | राष्ट्रसेवा के बल से इन्होने मनुष्यता से भी ऊपर छलांग लगा दी है | मनुष्य को अपने मनुष्य होने पर बहुत गर्व होता है परन्तु जब तक “देशद्रोही” और मानवताद्रोही हैं तब तक तो कम से कम हम ये गर्व करना छोड़ दें | सुना है कुत्ते की मौत बड़ी बदनाम होती है | लेकिन अब तो लग रहा है जैसे ये मुहावरा बदल कर कन्हैया की मौत कर देना चाहिए | हमारे देश में जहां “कन्हैया” जैसे युवा हैं जिन्होंने इस राष्ट्र का नमक खाकर, करोडो के संसाधन (JNU) खर्च करवा कर एक बेमतलब की शिक्षा ली और इसी देश की बर्बादी के लिए, वामपंथी हो गए | ऐसे अन्य लोग भी हैं जो राजनीति के लिए इतने नीचे गिर जाते हैं कि दशहरे पर प्रधानमंत्री को “जय श्री राम” नहीं बोलने देते हैं | खुद चाहे ईद पर बड़े-बड़े आयोजन करें, टोपी लगायें, लेकिन एक हिन्दू त्यौहार पर इनका रवैया दुश्मनों जैसा हो जाता है | देश में इस प्रकार का सांप्रदायिक जहर घोल रहीं पार्टियां भी किसी गद्दार से कम नहीं है | कुछ लोग राजनीती के लिए सेना पर ही सवाल उठाने लगे | तो कुछ लोग वोट के लिए लाखों-करोडो मुस्लिम महिलाओं को मिलने वाला न्याय छीन रहे हैं | सैकड़ो सालों ने मुस्लिम महिलाए तीन-तलाक के नाम पर अन्याय सहन करती आई है, उन्हें लगता था कि देश का संविधान उन्हें न्यायपूर्ण सामाजिक व्यवस्था उपलब्ध करा देगा परन्तु वोट-बैंक की राजनीती के चलते शायद ऐसा कभी न हो पाए |

इन मनुष्यों को देखकर ख्याल आता है कि भगवान अगर हम से पाप हो जाए तो अगले जनम में डिमोशन करके ऐसे इंसान बनाने की बजाय सीजर, टाईगर जैसे कुत्ता बना देना ! जितना जियेंगे शान से जियेंगे, जब मौत आएगी तो शान से मरेंगे | मौत के बाद भी इंसान हमारी वफादारी की कहानी सुनायेंगे |

वन्दे मातरम ! सीजर, टाईगर, मैक्स, सुलतान  चारों  दोस्तों को हमारा नमन |

जय हिन्द !

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